प्रमोद यादव की रिपोर्ट
बिलासपुर -ग्राम पंचायत अमाली में प्रस्तावित मेसर्स विराज अर्थ फ्यूजन प्राइवेट लिमिटेड की कोल वाशरी परियोजना के विरोध में शुक्रवार को आयोजित जनसुनवाई जनाक्रोश का केंद्र बन गई। अमाली, बिल्लीबंद, खुरदुर, नवागांव, सलका सहित आसपास के प्रभावित गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचे और एक स्वर में कोल वाशरी का विरोध करते हुए कहा कि रोजगार के नाम पर उनके भविष्य, जल, जंगल और जमीन से समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

ग्राम पंचायत अमाली के सरपंच मोनू सिंह, उपसरपंच श्याम यादव एवं पंचों ने भी स्पष्ट शब्दों में कहा कि गांव की सहमति के बिना किसी भी कीमत पर कोल वाशरी स्वीकार नहीं की जाएगी।
पूर्व जनपद अध्यक्ष संदीप शुक्ला ने आरोप लगाया कि जनसुनवाई नियमों की अनदेखी करते हुए कंपनी की निजी भूमि पर कराई गई, जबकि इसका आयोजन शासकीय परिसर में होना चाहिए था। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित कोल वाशरी के समीप शासकीय महाविद्यालय और अचानकमार टाइगर रिजर्व क्षेत्र स्थित है। पेसा एक्ट लागू होने के बावजूद ग्राम सभा की सहमति नहीं ली गई, जो गंभीर विषय है।
शुक्ला ने यह भी आरोप लगाया कि जनसुनवाई के दौरान बाहरी लोगों और बाउंसरों को बुलाकर माहौल प्रभावित करने का प्रयास किया गया।
उनका कहना था कि प्रभावित ग्रामीणों की पहचान के नाम पर आधार कार्ड जांचे जा रहे थे, जबकि बाहर से आए लोगों को समर्थन के लिए प्रवेश दिया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि जनसुनवाई समाप्त होने की घोषणा के बाद भी दोबारा समर्थन जुटाने के लिए प्रक्रिया शुरू कराई गई।
संदीप शुक्ला ने चेतावनी दी कि यदि जनता के व्यापक विरोध को नजरअंदाज कर कोल वाशरी को मंजूरी दी जाती है तो प्रभावित ग्रामीण हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे और कानूनी लड़ाई लड़ेंगे।
जनसुनवाई में जिला पंचायत सदस्य रजनी मरकाम, राजेश्वरी प्रभु जगत, आदित्य दीक्षित, अरुण त्रिवेदी, संतोष गुप्ता, कुलवंत सिंह, अफजल खान, कमलू कश्यप, कान्हा गुप्ता, लकी मिश्रा, वीणा मसीह, माया मिश्रा सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित रहे।

