इमरान खान की रिपोर्ट
बिलासपुर — सुशासन तिहार 2026 का उद्देश्य आम नागरिकों की समस्याओं का समाधान कर शासन-प्रशासन के प्रति विश्वास मजबूत करना है, लेकिन रतनपुर में सामने आए एक मामले ने इस उद्देश्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि उसकी शिकायत की निष्पक्ष जांच करने के बजाय उसे शिकायत वापस लेने और समझौता करने के लिए दबाव का सामना करना पड़ा।
रतनपुर निवासी रविंद्र सिंह राजपूत ने जनसमस्या निवारण शिविर में दिए आवेदन में बताया है कि उन्होंने रतनपुर स्थित पशु चिकित्सालय में लंबे समय से पदस्थ एक पशु चिकित्सक के संबंध में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत पर कार्रवाई के लिए उन्हें 28 मई 2026 को उपस्थित होने का पत्र भी जारी किया गया था। शिकायतकर्ता को उम्मीद थी कि उसकी बात सुनी जाएगी, तथ्यों के आधार पर जांच होगी और यदि कोई अनियमितता है तो उस पर उचित कार्रवाई की जाएगी।
लेकिन शिकायतकर्ता का आरोप है कि जांच प्रक्रिया के दौरान कुछ अधिकारियों ने निष्पक्षता बरतने के बजाय उन पर लगातार शिकायत वापस लेने अथवा संबंधित पक्ष से समझौता करने का दबाव बनाया। आवेदन में उल्लेख किया गया है कि इस तरह के व्यवहार से वे मानसिक रूप से आहत और प्रताड़ित महसूस कर रहे हैं। उनका कहना है कि एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में उन्होंने व्यवस्था में विश्वास रखते हुए शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन जिस तरह का व्यवहार उन्हें झेलना पड़ा, उससे उनका भरोसा कमजोर हुआ है।
शिकायतकर्ता ने अपने आवेदन में यह भी कहा है कि किसी भी शिकायत की जांच का उद्देश्य सत्य को सामने लाना होना चाहिए, न कि शिकायतकर्ता को ही दबाव में लाकर पीछे हटने के लिए मजबूर करना। यदि शिकायतकर्ता को ही अपनी शिकायत पर कायम रहने के लिए संघर्ष करना पड़े, तो यह पूरी जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
रविंद्र सिंह राजपूत ने प्रशासन से मांग की है कि शिकायत वापस लेने या समझौता करने के लिए दबाव बनाने वाले अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। साथ ही उन्होंने अपनी मूल शिकायत पर भी निष्पक्ष, तथ्यात्मक और पारदर्शी जांच कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने का आग्रह किया है।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि सुशासन तिहार जैसे कार्यक्रमों का मूल उद्देश्य आम लोगों की शिकायतों का समाधान करना और प्रशासन के प्रति विश्वास को मजबूत करना है। ऐसे में यदि किसी शिकायतकर्ता द्वारा दबाव और प्रताड़ना जैसे आरोप लगाए जाते हैं, तो यह न केवल संबंधित विभाग बल्कि पूरी व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।

