परसापानी प्राथमिक शाला में स्कूल को मिलने वाली राशि में बड़ा खेल! फर्जी बिलिंग और अनियमितताओं के गंभीर आरोप, जांच की मांग तेज

इमरान खान की रिपोर्ट

बिलासपुर — जिले के विकासखंड कोटा अंतर्गत आने वाले शासकीय प्राथमिक शाला परसापानी (संकुल छतौना) में स्कूल को मिलने वाली खर्च की राशि को लेकर बड़े स्तर पर अनियमितताओं और फर्जी बिलिंग का मामला सामने आया है। इस संबंध में विकासखंड शिक्षा अधिकारी को लिखित शिकायत सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है।

फर्जी बिलिंग के गंभीर आरोप —**– शिकायत में उल्लेख किया गया है कि दिनांक 14 फरवरी 2025 को मानोज किराना एवं जनरल स्टोर के नाम से एक बिल प्रस्तुत किया गया, जिसमें न तो बिल क्रमांक अंकित है और न ही वह दुकान संचालक द्वारा जारी किया गया है। शिकायतकर्ता के अनुसार जब इस संबंध में दुकान संचालक से जानकारी ली गई, तो उन्होंने स्पष्ट रूप से इस बिल को फर्जी बताया और कहा कि उनके नाम से छेड़छाड़ कर बिल तैयार किया गया है।

खाद्य सामग्री खरीदी में गड़बड़ी —***— इसी दिन ओम स्वीट्स एवं फैमिली रेस्टोरेंट के नाम से भी बिल क्रमांक 96 में बड़ी मात्रा में खाद्य सामग्री की खरीदी दर्शाई गई है, जिसमें लगभग 8 किलो सेव और 5 किलो से अधिक बूंदी शामिल है। शिकायतकर्ता का कहना है कि फरवरी माह में विद्यालय में छात्रों की संख्या के हिसाब से इतनी अधिक मात्रा में खाद्य सामग्री की आवश्यकता नहीं होती, जिससे यह खरीदी संदिग्ध प्रतीत होती है।

बिलों में क्रमांक और सामग्री को लेकर विसंगतियां —****—- पटेल स्टूडियो किराना एवं जनरल स्टोर के नाम से 3850 रुपये का बिल भी प्रस्तुत किया गया है, जिसमें बिल क्रमांक अंकित नहीं है। साथ ही शिकायत में यह भी बताया गया है कि जिन वस्तुओं की खरीदी दर्शाई गई है, वे उस दुकान में उपलब्ध ही नहीं होतीं। इससे इस बिल की सत्यता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

इलेक्ट्रिकल सामग्री में भी गड़बड़ी का आरोप —***— रीना इलेक्ट्रिकल्स के नाम से बिल क्रमांक 151 में 3000 रुपये की राशि से दो नग सीलिंग फैन की खरीदी दिखाई गई है। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि इसकी स्थल पर जांच कर यह सुनिश्चित किया जाए कि उक्त सामग्री वास्तव में विद्यालय में उपलब्ध है या नहीं।

बिल क्रमांक में गड़बड़ी और दूरस्थ खरीद पर सवाल —***—- शिकायत में आगे बताया गया है कि कुछ बिलों के क्रमांक में असंगतता पाई गई है, जैसे एक दुकान का बिल क्रमांक आगे-पीछे की तारीखों में उल्टा दर्ज है, जो फर्जी बिलिंग की ओर संकेत करता है। इसके अलावा, लगभग 180 किलोमीटर दूर स्थित स्थानों से सामग्री खरीदी दिखाना भी संदिग्ध बताया गया है, जबकि स्थानीय स्तर पर सामग्री उपलब्ध रहती है।

वर्ष 2023 से अब तक के सभी खर्चों की जांच की मांग —***— शिकायतकर्ता ने मांग की है कि वर्ष 2023 से वर्तमान तक के सभी बिलों और खर्चों की गहन जांच कर यह सुनिश्चित किया जाए कि शाला को मिलने वाली राशि का उपयोग शासन के नियमों और मापदंडों के अनुरूप किया गया है या नहीं। साथ ही, एक जांच टीम गठित कर मौके पर निरीक्षण करने तथा जांच रिपोर्ट शिकायतकर्ता के समक्ष प्रस्तुत करने की मांग भी की गई है।

जवाबदेही तय करने की मांग —***—- मामले की गंभीरता को देखते हुए शिकायतकर्ता ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और शासकीय राशि के दुरुपयोग की स्थिति में वसूली एवं दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने की बात कही है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा कर सकता है।

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