आदिवासी क्षेत्रो के स्कूलों की बदहाल स्थिति,शिक्षकों कों स्कूल आने का समय पता नहीं,ग्रामीण बच्चों का भविष्य अँधेरे मेस्कूलों की जर्ज़र स्थिति,बच्चों के मध्यान भोजन मे पूर्ण आहार मे कमी,इलेक्ट्रिक बिजली मीटर तार से खेलते बच्चे,

जितेन्द्र खुसरो की रिपोर्ट,
सोनसाय नवागांव :- बिलासपुर जिले की कोटा विकास खण्ड के आदिवासी क्षेत्रो के स्कूलों की बदहाल स्थिति है,शा. प्रा. शा. माझगांव, शा. प्रा. शा. केंदाडांड,/शा.पू.मा.शा. केंदाडांड में अध्यापक समय से नहीं पहुंच रहे स्कूल जिससे पढ़ने वाले छात्र छात्राओं की पढ़ाई चौपट हो रही है। बिना शिक्षक के बच्चे राष्ट्रगान करते दिखे तो इसे अंदाजा लगाया जा सकता है की कितनी बड़ी लापरवाही है इसके बाद भी इन अध्यापकों में कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति होती है। सरकार शिक्षा के प्रति सजग है और कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे इसके लिए प्रयास कर रही है।
शिक्षकों कों स्कूल आने का समय पता नहीं: –
ब्लाक क्षेत्र में कई स्कूल ऐसे हैं जहां अध्यापक स्कूल समय से नहीं पहुंच रहे हैं जबकि स्कूल खुलने का समय सुबह 10 :30 से 11:00 बजे तक स्कूल पहोचते है । सवाल पूछने पर गोल – मोल जवाब । मॉनीटरिंग नहीं होने से बढ़ी लापरवाही वनांचल क्षेत्र होने के कारण शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों द्वारा इन क्षेत्रों मे सही ढंग से मॉनीटरिंग नहीं की जाती
ग्रामीण बच्चों का भविष्य अँधेरे मे :-
इसी के चलते शिक्षकों की लापरवाही देखने को मिल रहीं है। शिक्षक को तो उनका वेतन मिल जाता है। लेकिन बच्चे सही शिक्षा ग्रहण करने से वंचित हो जाते हैं। इसलिए वनांचल क्षेत्र के बच्चों का शिक्षा के क्षेत्र में सही ढंग से विकास नहीं हो पा रहा है। इस लिए लापरवाही बरतने वाले शिक्षकों पर तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए। क्योंकि बच्चों के भविष्य का सवाल है। मनमानी करने वाले शिक्षक बच्चों को गलत शिक्षा दे रहे हैं।

यह समस्या न केवल छात्रों के शैक्षणिक भविष्य को प्रभावित करती है, बल्कि छात्रों में यह धारणा भी विकसित कर सकती है कि देर से आना स्वीकार्य है, जो उनके भविष्य के कार्य-नैतिकता और रोज़गार के अवसरों पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। कुछ जगहों पर, शिक्षकों की आपसी मिलीभगत से कुछ शिक्षक ही नियमित रूप से स्कूल आते हैं, जबकि बाकी घर बैठे वेतन प्राप्त करते हैं। इससे स्कूल का संचालन ठीक से नहीं हो पाता है और छात्रों की शिक्षा प्रभावित होती है।
स्कूलों की जर्ज़र स्थिति,
बच्चों के मध्यान भोजन मे पूर्ण आहार मे कमी,
इलेक्ट्रिक बिजली मीटर तार से खेलते बच्चे,:-
बिलासपुर जिले की कोटा विकास खण्ड के आदिवासी क्षेत्र के शा. प्रा. शा. बंजारीपारा मे दरवाजा, छत, शौचालय राशोई की स्तिथि बहुत ख़राब है कभी भी दुर्घटना हो सकता है, साथ ही शिक्षक भी अनुपस्थित पाया गया l वहा के बच्चे इलेक्ट्रिक बिजली मीटर के तार से खेलते हुए दिखे l जब उपस्थित शिक्षक चंद्रभान सिंह कुशराम से पूछा गया तो जानकारी नहीं बतायी गई, उच्च अधिकारि का नाम ले के मना कर दिया,पूरी तरह से गोल-मोल जवाब दिया गया l
ऐसे यदि होता रहा तो गरीब और पिछड़े क्षेत्रो के बच्चों का भविष्य खबर हो जायेगा, जहाँ शिक्षा की नीव रखी जाति है, यदि वह नीव ही खबर होंगी तो उनका भविष्य अंधकार मे चला जायेगा जिसका जिम्मेदार कोन होगा क्या शिक्षक जिम्मेदार है या अधिकारी जो स्कूल का उचित निरिक्षण मे पहोच नहीं पाते है , या उनके पालक जो शिक्षक के भरोसे उन्हें स्कूल मे पढ़ने भेजते है l
अधिकारि ने क्या बोला इस सम्बन्ध मे :-
कोटा विकासखंड के बीईओ नरेंद्र मिश्रा के द्वारा यह बोला गया कि सभी स्कूलों की जानकारी आप लोगों से मिला है मैं जाँच करा कर शिक्षक दोषी पाए जाते है,तो उचित से उचित कार्यवाही किया जाएगा साथ ही वेतन कटा जायेगा,जहाँ कमी है वहाँ सुधार किया जायेगा

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