प्रधानमंत्री के जन्मदिन का जश्न… और मासूमों की शाम स्कूल में कैद!
बिलासपुर — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर कोटा विकासखंड के अंतर्गत मिठ्ठू नवागांव संकुल के ग्राम सोनपुरी स्थित प्राथमिक शाला एवं पूर्व माध्यमिक शाला में कार्यक्रम आयोजित किया गया। लेकिन इस आयोजन को लेकर अब एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने विद्यालय प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बताया जा रहा है कि कार्यक्रम के चलते स्कूली बच्चों को शाम करीब 6.30 बजे तक विद्यालय में ही रोककर रखा गया। जिन मासूमों को सामान्य समय पर अपने घर पहुंच जाना चाहिए था, वे देर शाम तक स्कूल परिसर में ही मौजूद रहे। समय बीतता गया, अंधेरा छाने लगा और बच्चों की निगाहें घर लौटने के रास्ते पर टिकी रहीं।
जिन हाथों में होनी चाहिए थी किताब, वे इंतजार में रहे
छोटे-छोटे बच्चों के लिए स्कूल केवल पढ़ाई की जगह नहीं, बल्कि उनके दिनचर्या का अहम हिस्सा है। लेकिन जब विद्यालय की छुट्टी का समय बीत जाने के बाद भी उन्हें घर जाने की अनुमति नहीं मिलती, तो उनके लिए स्थिति कितनी परेशानी भरी रही होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। ग्रामीण क्षेत्र में कई बच्चे दूर-दराज से स्कूल पहुंचते हैं। कोई पैदल आता है तो कोई साइकिल से। ऐसे में शाम तक विद्यालय में रोके जाने से बच्चों की सुरक्षा और अभिभावकों की चिंता दोनों बढ़ना स्वाभाविक है।
कार्यक्रम जरूरी या बच्चों की सुरक्षा?
प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर विद्यालय में कार्यक्रम आयोजित करना अलग विषय है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या किसी आयोजन के लिए छोटे बच्चों को निर्धारित समय के बाद इतनी देर तक स्कूल में रोकना जरूरी था? यदि कार्यक्रम विद्यालयीन समय के बाद तक चलना था, तो क्या अभिभावकों को इसकी पूर्व सूचना दी गई थी? बच्चों को घर पहुंचाने के लिए क्या कोई व्यवस्था की गई थी? और सबसे महत्वपूर्ण—शाम 6.30 बजे तक बच्चों को विद्यालय में रोकने का निर्णय आखिर किसके निर्देश पर लिया गया?
जांच हुई तो सामने आएगी पूरी सच्चाई
मामले को लेकर शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है। जांच में यह स्पष्ट होना चाहिए कि विद्यालय में कार्यक्रम कितने समय तक चला, बच्चों को निर्धारित समय के बाद क्यों रोका गया, कितने बच्चे मौजूद थे और उन्हें घर भेजने के लिए क्या व्यवस्था की गई थी। यदि बच्चों को वास्तव में बिना उचित व्यवस्था के शाम 6.30 बजे तक विद्यालय में रोका गया, तो जिम्मेदारी तय होना भी जरूरी है। मासूमों के चेहरे पर खुशी लाने के लिए मनाया गया जन्मदिन समारोह कहीं उन्हीं मासूमों के लिए परेशानी का सबब तो नहीं बन गया?

