प्राथमिक शाला के शिक्षक पर शराब के नशे में स्कूल पहुंचने और प्रधानमंत्री को अपशब्द कहने का दावा, लेकिन जिस संस्था का नाम खबरों में है वह शिक्षा विभाग के अधीन नहीं
बिलासपुर —- प्राथमिक शाला बहेरामुड़ा को लेकर इन दिनों सोशल मीडिया और कुछ समाचार माध्यमों में एक खबर तेजी से प्रसारित हो रही है। खबर में दावा किया जा रहा है कि स्कूल में पदस्थ एक शिक्षक शराब के नशे में विद्यालय पहुंचे और देश के प्रधानमंत्री के प्रति भी आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया। साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि मामले की जानकारी के बावजूद शिक्षा विभाग द्वारा संबंधित शिक्षक के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। हालांकि इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है, जिस पर ध्यान देना जरूरी है। जिस संस्था को खबरों में प्राथमिक शाला बहेरामुड़ा के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, वह वास्तव में ‘विद्या मंदिर बहेरामुड़ा’ नामक अर्धशासकीय संस्था बताई जा रही है, जो वर्धा स्कूल संस्था से संबद्ध है।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि संबंधित संस्था शिक्षा विभाग के अधीन ही नहीं आती, तो उसके शिक्षक के खिलाफ शिक्षा विभाग द्वारा कार्रवाई नहीं किए जाने का सवाल किस आधार पर उठाया जा रहा है?
खबर से पहले संस्था की वास्तविक स्थिति की जांच जरूरी
किसी भी शिक्षक पर शराब के नशे में विद्यालय आने अथवा प्रधानमंत्री के खिलाफ अपशब्द कहने जैसे गंभीर आरोप लगाना बेहद संवेदनशील मामला है। ऐसे आरोपों की पुष्टि संबंधित संस्था, प्रत्यक्षदर्शियों, जांच रिपोर्ट अथवा अधिकृत दस्तावेजों के आधार पर होना जरूरी है। यदि संबंधित विद्यालय शिक्षा विभाग के अंतर्गत संचालित शासकीय प्राथमिक शाला नहीं, बल्कि किसी अन्य संस्था से संबद्ध अर्धशासकीय शिक्षण संस्था है, तो कार्रवाई के लिए जिम्मेदार विभाग अथवा प्रबंधन भी अलग हो सकता है।
सवाल आरोपों की सच्चाई का भी और संस्था की पहचान का भी
यदि शिक्षक के खिलाफ लगाए गए आरोप सही हैं तो संबंधित संस्था के जिम्मेदार अधिकारियों को मामले की जांच कर उचित कार्रवाई करनी चाहिए। वहीं यदि खबर में संस्था की पहचान या विभागीय संबद्धता ही गलत बताई गई है, तो उस तथ्य को भी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाना चाहिए।

