प्रमोद यादव की रिपोर्ट
📍 कोटा–बिलासपुर।
कांग्रेस संगठन सृजन प्रक्रिया के तहत बिलासपुर ग्रामीण जिला अध्यक्ष पद के लिए वरिष्ठ कांग्रेस नेता संदीप शुक्ला ने आधिकारिक रूप से अपनी दावेदारी पेश की है। उनके इस निर्णय के बाद क्षेत्र के कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है।
संदीप शुक्ला लंबे समय से कांग्रेस संगठन से जुड़े हुए हैं और उन्होंने पार्टी में कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है —
वे पूर्व जनपद अध्यक्ष कोटा, पूर्व मंडी अध्यक्ष, पूर्व ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष (कोटा-बेलगहना) और पूर्व जिला अध्यक्ष किसान कांग्रेस, बिलासपुर रह चुके हैं।
उनके समर्थकों का कहना है कि इस बार कांग्रेस को ऐसा नेतृत्व चाहिए जो ग्राम स्तर से जुड़ा, संघर्षशील और संवेदनशील हो।
कार्यकर्ताओं का मानना है कि शुक्ला सदैव किसानों, मजदूरों, महिलाओं और कार्यकर्ताओं की समस्याओं को उठाने में अग्रणी रहे हैं।
सामाजिक एवं आरटीआई कार्यकर्ता प्रदीप शर्मा ने भी संदीप शुक्ला के समर्थन में कहा —
“जिला अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद पर संदीप शुक्ला जैसे व्यक्तियों की आवश्यकता है।
वे सदैव जनता के बीच रहकर उनकी आवाज़ को संगठन तक पहुँचाते हैं। ऐसे नेतृत्व से ही कांग्रेस को नई ऊर्जा और मजबूती मिलेगी।”
वहीं, अंतिम आदिवासी ग्राम टाटीधार, मोहली, आमगोहन समेत कई ग्रामीण इलाकों की युवा कांग्रेस इकाई ने भी संदीप शुक्ला के पक्ष में समर्थन जताया है।
इन इकाइयों के प्रतिनिधि स्वराज पटेल और अन्य युवाओं ने कहा कि “संदीप शुक्ला जैसे नेता ही कांग्रेस को गाँव, खेत और जंगल तक सशक्त बना सकते हैं।”
कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस बार “अध्यक्ष अब ग्राम से हो” की मांग ज़ोर पकड़ चुकी है, और बिलासपुर ग्रामीण कांग्रेस को ऐसा नेतृत्व चाहिए जो जमीनी स्तर पर पार्टी को संगठित कर सके।
संदीप शुक्ला ने भी अपने बयान में कहा कि —
“मैं सदैव संगठन को मज़बूती देने और कांग्रेस की विचारधारा को जन-जन तक पहुँचाने के लिए कार्यरत रहा हूँ। यदि कार्यकर्ता साथ दें तो हम सब मिलकर आने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को और मज़बूती से खड़ा करेंगे।”
बिलासपुर ग्रासंदीप शुक्ला ने की बिलासपुर ग्रामीण कांग्रेस अध्यक्ष पद की दावेदारी, समर्थकों में उत्साह की लहरमीण कांग्रेस में अब यह दावेदारी चर्चा का प्रमुख विषय बन गई है।
कार्यकर्ताओं के बीच यह भावना है कि यदि नेतृत्व किसी सच्चे ग्रामीण और सक्रिय कार्यकर्ता के हाथों में आता है, तो संगठन को नई दिशा और गति मिलेगी।

