
प्रमोद यादव की रिपोर्ट
बिलासपुर — जनपद पंचायत कोटा के अंतर्गत ग्राम पंचायत मझवानी स्थित हाईस्कूल परिसर में निर्माणाधीन बाउंड्रीवाल की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जिस बाउंड्रीवाल का निर्माण विद्यालय की सुरक्षा और मजबूती के उद्देश्य से किया जा रहा है, उसी निर्माण कार्य में कथित लापरवाही की तस्वीर सामने आने से निर्माण एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। निर्माण कार्य के दौरान पानी की पर्याप्त तराई नहीं किए जाने, दीवार और छज्जे में दरारें आने तथा निर्माण सामग्री की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें सामने आ रही हैं। यदि इन शिकायतों की जांच में लापरवाही की पुष्टि होती है, तो यह सरकारी राशि के उपयोग और निर्माण कार्यों की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करेगा।
दीवार और छज्जे में दरारें, निर्माण की मजबूती पर सवाल
निर्माणाधीन बाउंड्रीवाल में कई जगह दरारें दिखाई देने की बात सामने आई है। दीवार के ऊपरी हिस्से में बनाए जा रहे छज्जे में भी दरारें आने की शिकायत है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि निर्माण कार्य पूरा होने से पहले ही दीवार की मजबूती पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार, निर्माण में इस्तेमाल की गई सामग्री की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि कुछ हिस्सों में निर्माण के दूसरे ही दिन दीवार टूटने लगी। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर निर्माण कार्य में किन सामग्रियों का इस्तेमाल किया जा रहा है? क्या निर्माण के दौरान निर्धारित तकनीकी मानकों का पालन किया जा रहा है? क्या संबंधित विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा समय-समय पर निर्माण कार्य का निरीक्षण किया जा रहा है?

पानी की तराई में लापरवाही, क्या मजबूती से हो रहा समझौता
किसी भी निर्माण कार्य में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पानी की तराई और उचित देखरेख का महत्वपूर्ण स्थान होता है। तराई में लापरवाही होने पर निर्माण की मजबूती प्रभावित हो सकती है। मझवानी हाईस्कूल की बाउंड्रीवाल के निर्माण में पर्याप्त तराई नहीं किए जाने की शिकायत सामने आने के बाद निर्माण कार्य की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच की आवश्यकता महसूस की जा रही है। यदि निर्माण के शुरुआती दौर में ही दीवार और छज्जे में दरारें आने लगी हैं, तो यह जांच का विषय है कि इसकी वजह निर्माण सामग्री है, तराई में कमी है, निर्माण की तकनीकी प्रक्रिया में खामी है या कोई अन्य कारण। बिना तकनीकी जांच के किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा, लेकिन सामने आ रही शिकायतों को नजरअंदाज करना भी जिम्मेदार अधिकारियों के लिए उचित नहीं होगा।

ईंटों के ऊपर महज 1 से 2 इंच ढलाई का आरोप, निर्धारित मोटाई की हो जांच
निर्माण कार्य को लेकर एक और गंभीर सवाल ढलाई की मोटाई को लेकर उठ रहा है। स्थानीय स्तर पर लगाए जा रहे आरोपों के अनुसार, ईंटों के ऊपर कुछ हिस्सों में महज 1 से 2 इंच की ढलाई की गई है, जबकि निर्माण से संबंधित निर्धारित मानक के अनुसार 6 इंच ढलाई किए जाने की बात कही जा रही है। यदि वास्तव में स्वीकृत प्राक्कलन और तकनीकी मानकों के विपरीत ढलाई की गई है, तो यह निर्माण की मजबूती को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में संबंधित विभाग के तकनीकी अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर ढलाई की वास्तविक मोटाई, इस्तेमाल की गई सामग्री और स्वीकृत प्राक्कलन का मिलान करना चाहिए। सवाल यह है कि निर्माण कार्य में कितनी मोटाई की ढलाई स्वीकृत है और मौके पर वास्तव में कितनी ढलाई की गई है? इसका जवाब केवल मौके की तकनीकी जांच और निर्माण से संबंधित दस्तावेजों के परीक्षण से ही सामने आ सकता है।
निर्माण स्थल पर सूचना पटल तक नहीं, जनता को कैसे मिलेगी जानकारी
सरकारी निर्माण कार्यों में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए निर्माण से संबंधित जानकारी आम लोगों तक पहुंचना जरूरी है। निर्माण कार्य की लागत, स्वीकृति, कार्य पूर्ण करने की अवधि और संबंधित एजेंसी जैसी जानकारियां उपलब्ध होने से जनता भी कार्य की निगरानी कर सकती है। लेकिन मझवानी हाईस्कूल में बाउंड्रीवाल निर्माण के दौरान सूचना पटल नहीं लगाए जाने की बात सामने आई है। ऐसे में ग्रामीणों के सामने यह जानने का सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर इस निर्माण कार्य पर कितनी राशि स्वीकृत हुई है, निर्माण की जिम्मेदारी किस एजेंसी को दी गई है और इसे किस समय-सीमा में पूरा किया जाना है।
जब निर्माण स्थल पर ही जरूरी जानकारी उपलब्ध नहीं होगी, तो आम नागरिक निर्माण की लागत और गुणवत्ता की निगरानी कैसे करेंगे? सूचना पटल नहीं होने के कारण निर्माण कार्य की जानकारी को लेकर पारदर्शिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। हालांकि, सूचना पटल लगाने की अनिवार्यता और उसके निर्धारित प्रारूप की पुष्टि संबंधित योजना के नियमों एवं स्वीकृत प्राक्कलन के आधार पर की जानी चाहिए।
स्कूल की सुरक्षा के नाम पर निर्माण, फिर गुणवत्ता से समझौता क्यों
विद्यालय परिसर की बाउंड्रीवाल का उद्देश्य विद्यार्थियों और स्कूल परिसर की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। ऐसे महत्वपूर्ण निर्माण कार्य में गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। यदि निर्माण कार्य में शुरुआती स्तर पर ही दरारें, टूट-फूट और ढलाई की मोटाई को लेकर सवाल सामने आने लगें, तो जिम्मेदार अधिकारियों को तत्काल संज्ञान लेकर जांच करनी चाहिए। सरकारी निर्माण कार्य केवल ईंट, सीमेंट और रेत जोड़कर दीवार खड़ी करने का नाम नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक धन और लोगों के भरोसे से जुड़ा विषय है। निर्माण कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही भविष्य में अतिरिक्त मरम्मत खर्च और सरकारी राशि के दोबारा उपयोग की नौबत ला सकती है। ऐसे में जरूरी है कि निर्माण पूरा होने का इंतजार करने के बजाय अभी गुणवत्ता की जांच की जाए, ताकि यदि कोई खामी है तो समय रहते उसे दूर किया जा सके।

